काबुल पर तालिबान के कब्जे के लगभग तीन महीने बाद, अफगानिस्तान में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत ‘अफगानिस्तान पर दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता’ का आयोजन कर रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 10 नवंबर को एनएसए की इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी करेंगे। जिसमें अफगानिस्तान के भविष्य पर चर्चा होगी। साथ ही वहां के सत्ता परिवर्तन से पैदा हुए हालात और सुरक्षा के खतरों से कैसे निपटा जाए इस पर भी विचार-मंथन होगा। बताया जा रहा है कि डोभाल 10 नवंबर को होने वाली इस वार्ता से पहले कल यानी मंगलवार को उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
तालिबान के कब्जे के बाद से ही अफगानिस्तान में आतंकी हमलों में इजाफा हुआ है।सूत्रों ने बताया है कि मध्य एशियाई देश नशीली दवाओं के उत्पादन और इसकी तस्करी को लेकर खासा चिंतित हैं। इन मुल्कों को इस बात की भी चिंता है कि अफगानिस्तान में छोड़े गए सैन्य हथियार खतरा बन सकते हैं। दरअसल, युद्ध के बाद वहां NATO सैनिकों के हथियार छूट गए हैं। वहीं, इस बैठक में शामिल होने के लिए चीन को भी न्योता भेजा गया था। हालांकि, चीन ने बैठक में शामिल नहीं होने वाला है। सूत्रों ने बताया कि चीन ने कहा कि शेड्यूलिंग समस्या के कारण वह बैठक में भाग लेने में असमर्थ है। इसने कहा कि अफगानिस्तान पर बहुपक्षीय और द्विपक्षीय रूप से भारत के साथ बातचीत के लिए ये पूरी तरह से तैयार है।
ईरान में हुई थीं इससे पहले बैठकें
बैठक को लेकर सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा अजीत डोवाल 10 नवंबर को अफगानिस्तान पर NSA स्तर की वार्ता से पहले कल उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। उन्होंने बताया कि इस फॉर्मेट में पहले 2018 और 2019 में ईरान में बैठक का आयोजन किया गया था। इन बैठकों में पाकिस्तान ने हिस्सा नहीं लिया था। हालांकि, चीन इन बैठकों का हिस्सा रहा था। यही वजह है कि भारत ने पाकिस्तान को बैठक में शामिल होने के लिए न्योता दिया था। लेकिन इसने शामिल होने से इनकार कर दिया।
पीएम मोदी करेंगे सभी देशों के NSA से बात
सूत्रों ने बताया कि सात देशों के NSA ने 10 नवंबर 2021 को ‘अफगानिस्तान पर दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता’ में भाग लेने की पुष्टि कर दी है। इन देशों में ईरान, रूस, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं. इस बैठक में शामिल होने वाले NSA से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुलाकात करेंगे। आठ देशों में से कोई भी (भारत सहित) तालिबान सरकार को मान्यता या वैधता नहीं देता है। भारत भी इसे मान्यता नहीं देता, इसलिए उसने अफगानिस्तान को वार्ता के लिए आमंत्रित नहीं किया है।
बैठक में शामिल नहीं होगा पाकिस्तान
इससे पहले, पाकिस्तान ने भी बैठक में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था। पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) मोईद युसूफ ने कहा कि वह भारत की मेजबानी में अफगानिस्तान पर होने वाले सम्मेलन के लिए वहां की यात्रा नहीं करेंगे. यह पूछे जाने पर कि क्या वह भारत की मेजबानी में होने वाली बैठक में शरीक होंगे, युसूफ ने कहा, ‘मैं नहीं जाउंगा। मैं नहीं जा रहा. एक विघ्नकर्ता (देश), शांति स्थापित करने वाला नहीं हो सकता।’ पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने भारत से मिले न्योते की पुष्टि की थी, लेकिन कहा था कि फैसला उपयुक्त समय पर किया जाएगा।
बैठक में किन मुद्दों को लेकर होगी चर्चा?
एनएसए लेवल की इस बैठक में मुख्य एजेंडा तालिबान के सत्ता में आने के बाद पैदा हुई सुरक्षा चुनौतियां, अफगानिस्तान में स्थिरता, समावेशी सरकार का गठन और इस सरकार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता जैसे मुद्दे हैं। ईरान, रूस और मध्य एशिया के मुल्कों की उपस्थिति अफगानिस्तान में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के क्षेत्रीय प्रयासों में भारत की भूमिका से जुड़े महत्व को रेखांकित करती है। अफगानिस्तान मुद्दे पर आगे बढ़ने के लिए इन देशों द्वारा संयुक्त रणनीति बनाई जाएगी।


















