इंसान जब से धरती पर जन्मा हैं तब से ही वह दुनिया पर मोह-माया की सभी वस्तुओ का प्रयोग करता हैं। जिसके बाद उसके कर्म ही ये तय करते हैं कि उसे स्वर्ग प्राप्त होगा या फिर नर्क, अपनी जिंदगी जी लेने के बाद जब उसकी मौत हो जाती है तो अपने कर्म के मुताबिक़, वो स्वर्ग या नर्क में जाता है. इंसान की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार के कई तरीके हैं. ये तरीके मरने वाले के धर्म के आधार पर तय किये जाते हैं. हिंदू धर्म में लाश को जलाया जाता है. मुस्लिम और ईसाई धर्म लाश को दफनाते हैं. हर प्रक्रिया में काफी समय लगता है.

भारत में बीते कुछ सालों से इलेक्ट्रिक मेथड से लाश जलाने का चलन शुरू हुआ है. इसमें एक भट्टी जैसे स्ट्रक्चर से गुजारकर लाश को राख में बदल दिया जाता है. हिंदू इस तरीके का अब इस्तेमाल करने लगे हैं. इसके पीछे ख़ास वजह थी. दरअसल, जब लाश को जलाया जाता है तो लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए पेड़ काटे जाते हैं. पर्यावरण को बचाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मेथड अब अपनाया जाने लगा है. लेकिन इस बीच यूके में एक और नए मेथड को इंट्रोड्यूज किया गया है.
अब आग भी नहीं पड़ेगी ज़रूरत

यूके में शुरू हुए इस नए तरीके में आग की जरुरत नहीं होगी. लाश को पानी में गलाया जाएगा. जी हां, इस मेथड में बॉडीज को एक बड़े से थैलानुमा टैंक में डाल दिया जाएगा. इसके बाद बॉडी को एक मशीन में घुसाया जाएगा, जिसके अंदर सिर्फ चार घंटे के अंदर लाश घुल जाएगी. इस मेथड में आग की जगह खौलते पानी का इस्तेमाल किया जाएगा. चार घंटे के बाद मशीन में डाले गए बैग में सिर्फ हड्डियां और राख बच जाएगी, जिसे परिजनों को सौंप दिया जाएगा.
इन देशो में पहले से ही हो रहा हैं इस्तमाल

यूके में इस मेथड को हाल ही में शुरू किया गया है. भारत में अभी तक इस मेथड का इस्तेमाल नहीं किया जाता. लेकिन ये तरीका साउथ अफ्रीका, कनाडा और अमेरिका के कुछ हिस्सों में काफी सालों से मशहूर है. पहले जहां अंतिम संस्कार के तरीके काफी लिमिटेड थे, आज के समय में कई तरीके मशहूर हो चुके हैं. इसमें से अब ये वॉटर मेथड भी शुरू हो गया है. धीरे-धीरे फ्यूनरल का भी बिजनेस फैलता जा रहा है.


















