भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जवाद चक्रवात के लिए अलर्ट जारी किया है। यह तूफान 4 दिसंबर की सुबह आन्ध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों तक पहुंच सकता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून खत्म होने के बाद यह पहला चक्रवाती तूफान है। मौसम पूर्वानुमान विभाग की मानें तो 3 दिसंबर को मध्य बंगाल की खाड़ी में चक्रवात के विकसित होने की संभावना है।इस कारण रेस्क्यू अभियान से जुड़े सभी विभाग जवाद चक्रवात को लेकर अलर्ट पर हैं।
ये चक्रवाती तूफान दक्षिण पश्चिम मानसून खत्म होने के बाद आया है। कयास ये लगाए जा रहे हैं कि जवाद चक्रवात जब सतह से टकराएगा उस दौरान 117 किलोमीटर घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। ऐसे में भारी बारिश होने की संभावना को व्यक्त किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज हम आपको बताने वाले हैं कि जवाद चक्रवात क्या है? और कैसे इस तूफान का नाम जवाद पड़ा?
जावेद चक्रवात कैसे पड़ा नाम?
जवाद एक अरबी शब्द है। अरबी शब्द में इसका अर्थ उदार या फिर दयालु होता है। इस कारण ये तूफान ज्यादा खतरनाक नहीं होने वाला है। इस चक्रवात का आम जन जीवन पर उतना विनाशकारी असर नहीं पड़ेगा, जितना की बाकी चक्रवाती तूफानों का पड़ता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार इस तूफान का नाम जवाद सऊदी अरब के सुझाव पर रखा गया है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि इस तूफान के कारण महाराष्ट्र और गुजरात के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।
4 दिसंबर की सुबह तटीय इलाकों से टकराएगा चक्रवात
IMD ने बताया है कि थाईलैंड तट पर एक कम दबाव का सिस्टम विकसित हो गया है और यह जल्द ही अंडमान सागर में प्रवेश करेगा। इससे निम्न दबाव का क्षेत्र मजबूत होगा और 2 दिसंबर तक यह बंगाल की खाड़ी तक पहुंच जाएगा। IMD के एक स्पेशल मौसम बुलेटिन में कहा गया है कि 4 दिसंबर की सुबह चक्रवात आन्ध्र प्रदेश और ओडिशा के तट को पार कर सकता है।
जवाद तूफान के अलर्ट को देखते हुए एनडीआरएफ के जवानों को रेस्क्यू अभियानों के लिए तैयार कर दिया गया है। वहीं पिछले साल मई में आए अम्फान चक्रवात के कारण कई लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। इस तूफान के कारण कई लोगों के घरों को नुकसान पहुंचा था। बचाव कार्य में लाखों लोगों को उनके घरों से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था।


















