विपक्ष के रवैये पर भड़के सभापति नायडू, कहा-1962 से हो रहा निलंबन, पहली बार नहीं हुआ ऐसा

राज्यसभा से 12 निलंबित सांसदों के जिद्दी रवैए पर उप राष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति एम वेंकैया नायडू ने

राज्यसभा से निलंबित किए गए 12 सांसद माफी नहीं मांगने पर अड़े है। निलंबन के खिलाफ कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल संसद परिसर में आज भी धरना दे रहे है। निलंबित सांसदों के जिद्दी रवैए पर उप राष्ट्रपति और राज्यसभा सभापति एम वेंकैया नायडू ने दुख जताया है।
सभापति एम वेंकैया नायडू ने गुरुवार को कहा कि नायडू ने कहा कि अमर्यादित आचरण के लिए सदस्यों को पहली बार निलंबित नहीं किया गया है। ऐसा 1962 से हो रहा है। सदस्यों के माफी मांगने पर निलंबन वापस ले लिया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि मीडिया से पता चला है कि निलम्बित सदस्य क्षमा मांगना नहीं चाहते हैं।
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उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के दौरान सदस्यों के अमर्यादित व्यवहार के कारण कार्रवाई की गयी है। सदस्यों का व्यवहार लोकतांत्रिक नहीं था। सभापति ने सदस्यों से सदन की कार्यवाही चलने देने का अनुरोध करते हुए कहा कि निलंबित सदस्यों का मामला सत्तपक्ष तथा विपक्ष को मिलकर हल करना चाहिए।
लोकतंत्र के इस मानदंड को स्वीकार नहीं करेगा देश
सभापति ने कहा कि दुर्भाग्य से, यह संदेश देने की कोशिश की जाती है कि सदन की ‘अपवित्रता’ लोकतांत्रिक है लेकिन इस तरह की बेअदबी के खिलाफ कार्रवाई ‘अलोकतांत्रिक’। मुझे यकीन है कि देश के लोग लोकतंत्र के इस नए मानदंड को स्वीकार नहीं करेंगे। 
निलंबन के खिलाफ संसद के बाहर और अंदर चल रहव घटनाक्रम को लोकतांत्रिक बताते एम वेंकैया नायडू ने कहा किनिलंबन के लिए दिए गए कारणों के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा जा रहा है, पिछले सत्र के दौरान कुछ सदस्यों के तिरस्कारपूर्ण आचरण, जिसे मैंने स्पष्ट रूप से ‘अपवित्र कार्य’ कहा है।
माफी पर वापस लिया जाएंगे निलंबन
सभापति ने कहा कि पहले भी इस तरह के निलंबन संबंधित सदस्यों के खेद जताने या फिर माफी मांगने पर वापस लिए गए हैं। मुझे इस बात से बहुत दर्द हुआ कि विपक्ष के कुछ नेताओं ने माफी मांगने से इनकार किया है और निलंबन की कार्रवाई को ही अलोकतांत्रिक करार दिया है। सदन के नेता भी यह कहा है कि यदि माफी मांग ली जाती है तो फिर निलंबन वापस ले लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इंसान ही गलती करता है और वही सुधार भी करता है। लेकिन कोई सुधार की बात से इनकार करके गलतियों का ही महिमामंडन नहीं कर सकता। 

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