सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तमिलनाडु के मंत्री वी सेंथिल बालाजी और उनकी पत्नी की मद्रास हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी, जिसमें ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी को वैध ठहराया गया था। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जस्टिस एएस बोपन्ना और एमएम सुंदरेश की पीठ ने बालाजी की याचिका खारिज करते हुए कैश फॉर जॉब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनकी हिरासत में पूछताछ की अनुमति दी।
कोर्ट ने कहा, बंदी प्रत्यक्षीकरण की याचिका सुनवाई योग्य नहीं
पिछले हफ्ते पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली बालाजी और उनकी पत्नी की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। मद्रास उच्च न्यायालय ने 14 जुलाई को ईडी द्वारा बालाजी की गिरफ्तारी और उसके बाद नकदी के बदले नौकरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में निचली अदालत द्वारा दी गई न्यायिक हिरासत को वैध ठहराया। उच्च न्यायालय का आदेश सेंथिल बालाजी की पत्नी मेगाला द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर आया।उच्च न्यायालय ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को कानून के तहत सुनवाई योग्य नहीं पाया।
जानिए ईडी ने क्यों किया था मद्रास हाई कोर्ट के फैसले का विरोध
इसने आगे स्पष्ट किया कि बालाजी द्वारा एक निजी अस्पताल में चिकित्सा उपचार के तहत बिताया गया समय ईडी को दी गई हिरासत की अवधि से बाहर रखा जाएगा। ईडी ने पिछले महीने राज्य के परिवहन विभाग में हुए नौकरी के बदले नकदी घोटाले के सिलसिले में सेंथिल बालाजी को गिरफ्तार किया था और वह अब भी बिना विभाग के मंत्री बने हुए हैं। ईडी ने पहले यह कहते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था कि मद्रास उच्च न्यायालय ने बालाजी की पत्नी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर विचार करने और ईडी द्वारा उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें सरकारी अस्पताल से चेन्नई के एक निजी अस्पताल में ले जाने की अनुमति देकर गलती की।


















