कांग्रेस नेता ने फिर उठाया अलग लिंगायत धर्म का मुद्दा, कहा-यह कोई चुनावी मुद्दा

कर्नाटक में पिछले चुनावों में मिली हार के बाद चुप रहे एमबी पाटिल ने घोषणा की कि लिंगायतों

कर्नाटक कांग्रेस के नेता एमबी पाटिल ने एक बार फिर से लिंगायतों के लिए एक अलग धर्म का मुद्दा उठाया है। कर्नाटक में पिछले चुनावों में मिली हार के बाद चुप रहे पाटिल ने घोषणा की कि लिंगायतों के लिए अलग धर्म का होना उनकी पहचान का एक मुद्दा है। वह शुक्रवार को नागनूर रुद्राक्षी मठ का दौरा करने के बाद बेलगावी में पत्रकारों से बात करने के दौरान इसका जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि वीरशैव लिंगायतों की एक उपजाति है। उनके मुताबिक, पिछली बार अनावश्यक भ्रम पैदा किया गया था, लेकिन अबकी बार हम इस मुद्दे को उठाने के लिए तैयार हैं। लिंगायतों के लिए एक अलग धार्मिक दर्जा प्राप्त करने का संघर्ष 12वीं शताब्दी में ही शुरू हो गया था। उन्होंने कहा कि यह कोई चुनावी मुद्दा नहीं है।
यह तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की एक अलग धर्म का मुद्दा उठाकर लिंगायत समुदाय को विभाजित करने की रणनीति थी, जिसे भाजपा का वोट बैंक माना जाता है। हालांकि, कांग्रेस और भाजपा की रणनीति चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और एक साल बाद सत्ता संभाली।

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