दिल्ली की सीमाओं पर लगातार 48 दिन से जारी किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज भी सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र द्वारा बनाए गए तीनों कृषि कानून के अमल पर रोक लगाते हुए इस मामले में वार्ता के लिए एक समिति का गठन किया है। कोर्ट ने सख्त रवैया अपनाते हुए कहा कि कोई ताकत उसे नए कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती तथा उसे समस्या का समाधान करने के लिए कानून को निलंबित करने का अधिकार है।
आज हुई सुनवाई में कोर्ट ने किसान संगठनों से सहयोग मांगते हुए कहा कि कृषि कानूनों पर ‘‘जो लोग सही में समाधान चाहते हैं, वे समिति के पास जाएंगे’’।प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे ने कहा कि यह समिति हमारे लिए होगी। आप सभी लोग जो इस मुद्दे को हल करने की उम्मीद कर रहे हैं, इस समिति के सामने जाएंगे। यह एक आदेश पारित नहीं करेगा या आपको दंडित नहीं करेगा, यह केवल हमें एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने आगे किसान संगठनों से कहा, ‘‘यह राजनीति नहीं है। राजनीति और न्यायतंत्र में फर्क है और आपको सहयोग करना ही होगा।’’
प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए यहां तक संकेत दिया था कि अगर सरकार इन कानूनों का अमल स्थगित नहीं करती है तो वह उन पर रोक लगा सकती है।
न्यायालय ने कहा कि कोई ताकत हमें नए कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती तथा हमें समस्या का समाधान करने के लिए कानून को निलंबित करने का अधिकार है।


















