महाभियोग मामले में कांग्रेस सांसदों के याचिका वापस लेने से प्रधान न्यायाधीश को मिली राहत

NULL

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को आज उस समय बड़ी राहत मिली जब उन्हें पद से हटाने के लिये दिए गए नोटिस को अस्वीकार करने के राज्यसभा के सभापति के निर्णय को चुनौती देने वाले कांग्रेस के सांसदों ने अपनी याचिका उच्चतम न्यायालय में वापस ले ली।

शीर्ष अदालत ने कांग्रेस के दो सांसदों की याचिका पर सुनवाई के लिये न्यायमूर्ति ए के सिकरी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ गठित करने को लेकर उठाये गये सवालों पर गौर करने के प्रति अनिच्छा जाहिर की।

सांसद प्रताप सिंह बाजवा और अमी हर्षदराय याज्ञनिक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस पीठ के गठन को लेकर पूछे गये सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अपनी याचिका वापस ले ली।

सिब्बल द्वारा याचिका वापस लेने का आग्रह करते ही संविधान पीठ ने इसे वापस लिया मानते हुये खारिज कर दिया।  न्यायमूर्ति सिकरी की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे , न्यायमूर्ति एन वी रमण , न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल शामिल थे।

इससे पहले , सिब्बल ने इस मामले में सुनवाई के लिये संविधान पीठ के गठन पर आपत्ति करते हुये अनेक सवाल उठाये। इसमे यह भी शामिल था कि इस मामले को संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश किसने दिया।

उन्होंने कहा कि यह मामला एक प्रशासनिक आदेश के माध्यम से पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ है और प्रधान न्यायाधीश इस मामले में ऐसा आदेश नहीं दे सकते हैं। उन्होंने यह पीठ गठित करने संबंधी प्रशासनिक आदेश की प्रति भी मांगी और कहा कि वह इसे चुनौती देना चाहते हैं।

परंतु अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने याचिका खारिज करने का अनुरोध करते हुये कहा कि राज्यसभा सभापति को नोटिस देने वाले 50 सांसदों में से सिर्फ दो ने ही शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है।

वेणुगोपाल ने कहा कि हालांकि कांग्रेस के दो सांसदों ने यह याचिका दायर की है परंतु नोटिस देने वाले छह अन्य विपक्षी दलों ने शीर्ष अदालत में सभापति के फैसले को चुनौती नहीं दी है।

अटार्नी जनरल ने कहा, ‘‘यह अनुमान लगाया जाता है कि दूसरे अन्य दलों ने नोटिस अस्वीकार करने के सभापति एम वेंकैया नाएडू के फैसले को चुनौती देने के कांग्रेस के दृष्टिकोण का समर्थन नहीं किया है।’’

उन्होंने यह भी दलील दी कि कांग्रेस के इन दो सांसदों को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने के लिये शेष सांसदों ने अधिकृत नहीं किया है।

इस पर संविधान पीठ ने कहा, ‘‘यह बहुत ही विचित्र और अप्रत्याशित स्थिति है जिसमें प्रधान न्यायाधीश एक पक्षकार है और चार अन्य न्यायाधीशों की भी कुछ भूमिका हो सकती है। हमें इस बारे में कुछ नहीं पता है।’’

पीठ ने बार बार सिब्बल से जानना चाहा कि प्रधान न्यायाधीश द्वारा पांच न्यायाधीशों की पीठ गठित करने के प्रशासनिक आदेश की प्रति यदि इन दो सांसदों को दे भी दी जाये तो इससे क्या होगा।

इस पर सिब्बल ने कहा कि इस आदेश की प्रति मिलने के बाद ही वह इसे चुनौती देने के बारे में कोई फैसला करेंगे। हालांकि, पीठ ने सिब्बल की इस दलील को स्वीकार करने में कोई इच्छा नहीं दिखाई तो वरिष्ठ अधिवक्ता ने याचिका वापस ले ली।

कांग्रेस के इन दो सांसदों ने सभापति के आदेश को चुनौती देते हुये कल उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी। कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इसका उल्लेख किया था। इस पीठ ने शुरू में तो यह कहा कि इसका उल्लेख प्रधान न्यायाधीश के समक्ष ही किया जाये लेकिन बाद में उसने इसका उल्लेख मंगलवार को करने के लिये कहा। पीठ ने कहा था कि कल इसे देखेंगे।

परंतु कल देर शाम न्यायालय की मंगलवार की कार्यसूची में कांग्रेसी सांसदों की यह याचिका न्यायमूर्ति सिकरी की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष सूचीबद्ध दिखाई गयी थी।

राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को पद से हटाने के लिये कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के पचास से अधिक सदस्यों द्वारा दिया गया महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस 23 अप्रैल को अस्वीकार कर दिया था।

अधिक लेटेस्ट खबरों के लिए यहां क्लिक  करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Girl in a jacket
पंजाब केसरी एक हिंदी भाषा का समाचार पत्र है जो भारत में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कई केंद्रों से प्रकाशित होता है।