राजधानी दिल्ली में डेंगू और मलेरिया के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है।बता दें मानसून के मौसम में जगह-जगह पानी जमा हो जाने से मच्छरों का आतंक सबसे ज्यादा बढ़ गया है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर दिल्ली में दिखाई दे रहा है।
इसी वजह से दिल्ली नगर निगम लगातार इसकी रोकथाम के प्रयास में लगा रहता है। इसके लिए निगम की तरफ से लगातार दवाओं का छिड़काव और फॉगिंग के काम के साथ लोगों के घरों की जांच भी की जाती है, जिससे मच्छरों की ब्रीडिंग को रोका जा सके।
मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाया जा सके
आपको बता दें अब इस कड़ी में MCD ने अब ‘मॉसक्विटो टर्मिनेटर ट्रेन’ चलाई है, जिससे रेलवे की पटरियों के किनारे मच्छर रोधी दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। नई दिल्ली स्टेशन से शुरू किए गए इस ‘मॉसक्विटो टर्मिनेटर ट्रेन’ को एमसीडी की मेयर डॉ. शैली ओबरॉय ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। इसके माध्यम से ‘एंटी लार्वा’ दवाओं का छिड़काव किया जाएगा, जिससे कि मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाया जा सके।
पटरियों के किनारे मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाना
दरअसल, उत्तर रेलवे के संयुक्त सहयोग से चलाई गई इस ‘मॉसक्विटो टर्मिनेटर ट्रेन’ को छह सप्ताह में कुल 12 बार चलाई जाएगी। मच्छरों की ब्रीडिंग को देखते हुए इसके जरिए सप्ताह में दो बार कीटनाशकों का ‘एंटी लार्वा’ दवाओं का छिड़काव किया जाएगा। इसका उद्देश्य ट्रेन की पटरियों के किनारे मच्छरों के प्रजनन पर रोक लगाना है।
घरों से निकलने वाला गंदा पानी रेलवे ट्रैक के किनारे जमा
बता दें अधिकारियों का कहना है कि ये कीटनाशक न केवल लार्वा को खत्म करेंगे, बल्कि मच्छरों को भी बेअसर करेंगे। इससे न रेल के पटरियों के किनारे झुग्गियां में बड़ी संख्या में रहने वाले लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को भी मच्छरों के प्रकोप से निजात मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि कई इलाकों में घरों से निकलने वाला गंदा पानी रेलवे ट्रैक के किनारे जमा हो जाता है, जिससे मच्छर पनपते हैं।


















