उच्च न्यायालय ने सभी जेलों में विधि अधिकारियों की नियुक्ति का दिया सुझाव, सरकार ने जवाब के लिए माँगा वक़्त

संक्षिप्त सुनवाई के बाद, आप सरकार ने जनहित याचिका पर जवाब दायर करने के लिए वक्त मांगा।

नयी दिल्ली :  दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी की सभी 16 जेलों में अनुबंध के आधार पर विधि अधिकारियों को नियुक्त करने का सुझाव दिया। मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने कहा कि समयबद्ध तरीके से राष्ट्रीय राजधानी की 16 जेलों में से हरेक में एक विधि अधिकारी नियुक्त करने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका में ‘अच्छा’ मुद्दा उठाया गया है और दिल्ली सरकार को मामले को देखने को कहा। 
दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए स्थायी अधिवक्ता (आपराधिक) राहुल मेहरा ने पीठ से कहा कि कारागार के महानिदेशक से सलाह-मशविरा किया गया है और विधि अधिकारियों को नियुक्त करने की प्रक्रिया जल्दी शुरू होगी। उन्होंने उच्च न्यायालय से कहा कि राज्य में 16 जेलें हैं जिनमें से तिहाड़ परिसर में नौ, रोहिणी जेल परिसर में एक और मंडोली जेल परिसर में छह जेलें हैं। 
वकील ने कहा कि दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के जरिए विधि अधिकारियों की नियुक्तियों में वक्त लग सकता है। इसलिए अन्य विकल्पों पर भी गौर किया जा रहा है। संक्षिप्त सुनवाई के बाद, आप सरकार ने जनहित याचिका पर जवाब दायर करने के लिए वक्त मांगा। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 सितंबर तक स्थगित कर दी। 
यह याचिका वकील अमित साहनी ने दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि दिल्ली कारागार अधिनियम 2000 में हर जेल में एक विधि अधिकारी का होना अनिवार्य है। बावजूद इसके फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी की 16 जेलों में एक केवल एक विधि अधिकारी है जो तिहाड़ जेल में कारा मुख्यालय में बैठता है। 

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