सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को निर्देश दिया कि दिल्ली मेट्रो के चौथे चरण की 103.94 किलोमीटर लंबी परियोजना के संचालन घाटे की भरपाई दिल्ली सरकार करेगी क्योंकि परिवहन का यह साधन राष्ट्रीय राजधानी में आवागमन के लिए है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह दिल्ली मेट्रो रेल निगम की वित्तीय स्थिति ठीक रखे और ऐसा कोई कदम नहीं उठाए जिसकी वजह से उसे घाटा उठाना पड़े।
न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने निर्देश दिया कि इस परियोजना के लिए भूमि की कीमत केन्द्र और दिल्ली सरकार को 50:50 के अनुपात में वहन करनी होगी। पीठ ने संबंधित प्राधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि मेट्रो परियोजना के चौथे चरण में किसी प्रकार का विलंब नहीं हो और भूमि की कुल कीमत की 2,247.19 करोड़ रूपए की राशि तत्काल जारी की जाए।
पीठ ने केन्द्र और दिल्ली सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वे भूमि की कीमत के भुगतान का तरीका तीन सप्ताह के भीतर तैयार करें। हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली सरकार से यह भी कहा कि वह जनता के पैसे का सही इस्तेमाल करे। 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो के 104-किलोमीटर के फेस-चार परियोजना पर काम शुरू करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया। इस मेट्रो के लिए जमीन का मुद्दा केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच झगड़े की वजह बन गई थी।


















